विवादित क्षेत्र नागोर्नो-काराबाख़ को लेकर 27 सितम्बर से शुरू हुए युद्ध में, आर्मेनिया के मुक़ाबले में आज़रबाइजान ने तुर्की के बायरकतर ड्रोन विमानों का बहुत ही सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है।
आज़रबाइजान ने आर्मेनियाई सेना के ठिकानों पर बायरकतर ड्रोन विमानों की बमबारी के वीडियो जारी किए हैं, जिसमें दुश्मन सेना के ड्रोन विमानों, टैकों, सैन्य वाहनों और सैन्य चौकियों को नष्ट होते हुए देखा जा सकता है।

यह वीडियो फ़ुटेज, हमावर ड्रोन विमानों में लगे कैमरों से ही बनाए गए हैं, जिनसे आर्मेनियाई सेना पर आज़री सेना का एक भय सा बैठ गया है।
हाल ही में तुर्की के टीवी चैनल टीआरटी के साथ बातचीत में आज़रबाइजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीओव ने तुर्की के इन ड्रोन विमानों की प्रशंसा करते हुए कहा थाः आज़रबाइजान की सेना द्वारा ख़रीदे गए तुर्की के आधुनिक ड्रोन विमानों की वजह से, युद्ध के मोर्चे पर हमें बहुत कम जानी नुक़सान हो रहा है। इन ड्रोन विमानों से तुर्की का ताक़त का पता चलता है, जिससे हमें भी ताक़त मिल रही है।
दूसरी ओर, रूस को आर्मेनिया का पारंपरिक सहयोगी माना जाता है और वह अपने इस सहयोगी देश को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है।
रूस ने तुर्की द्वारा निर्मित आज़रबाइजान के ड्रोन विमानों को निशाना बनाने के लिए क्रासुख़ा प्रणाली के इस्तेमाल का फ़ैसला किया है, जो एक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है, जिसे ड्रोन विमान जैसे इलेक्ट्रॉनिक सैन्य उपकरणों को निष्क्रिय करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
रूस ने इस प्रणाली का इस्तेमाल, सीरिया में अपने सैन्य अड्डे ख़मीमीम की सुरक्षा के लिए किया था, जब कई ड्रोन विमानों ने इस सैन्य अड्डे के सुरक्षा दायरे में घुसने की कोशिश की थी।
रूसी मीडिया का दावा है कि इसी प्रणाली का इस्तेमाल करके, आज़रबाइजान-आर्मेनिया युद्ध में अब तक 9 बायरकतर ड्रोन विमानों को गिराया जा चुका है। आर्मेनिया ने मार गिराए गए ड्रोन विमानों की कुछ तस्वीरें भी जारी की हैं।
हालांकि आज़रबाइजान या तुर्की ने अभी तक इन दावों के बारे में कुछ नहीं कहा है, जिन्हें आर्मेनिया के गीमूरी इलाक़े में मार गिराने की बात कही गई है।
जबकि सच्चाई यह है कि क्रासुख़ा प्रणाली को काराबाख़ के इलाक़े में तैनात नहीं किया गया है और आर्मेनियाई सैनिक इसका संचालन नहीं कर रहे हैं। रूसी अधिकारियों ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्होंने इस प्रणाली को आर्मेनिया स्थित अपने सैन्य अड्डे में तैनात किया है। जबकि तुर्की के ड्रोन विमान, गीमूरी इलाक़े में आप्रेशन कर रहे हैं। यहां यह सवाल है कि आज़री सेना अपने ड्रोन विमानों को रूसी सैन्य अड्डे के नज़दीक क्यों उड़ाएगी? जबकि आर्मेनिया ने जिन ड्रोन विमानों की तस्वीरें जारी की हैं, वह मिसाइलों से लैस नहीं थे।